Dhyan Aur Manobal (PB)

140

ISBN: 978-81-7309-2
Pages: 317
Edition: Fifth
Language: Hindi
Year: 2007
Binding: Paper Back

Availability: 29 in stock Category:

Description

साधारणतया ध्यान का सम्बन्ध आत्मा, ईश्वर आदि अतीन्द्रिय तत्त्वों के साथ जोडा जाता है। किंतु लौकिक जीवन में भी उसकी उतनी ही उपयोगिता है जितनी आध्यात्मिक जीवन में । हम व्यायाम द्वारा शारीरिक शक्ति प्राप्त करते हैं, उसे अच्छे या बुरे किसी भी कार्य में लगाया जा सकता है। इसी प्रकार ध्यान द्वारा मानसिक शक्ति प्राप्त की जाती है। वैज्ञानिक उसका उपयोग नवीन अन्वेषण में करता है। उसने ऐसी औषधियों का पता लगाया जिनसे करोड़ों व्यक्तियों के प्राण बच गए। आणविक अस्त्रों का भी पता लगाया जिनसे समस्त मानवता का अस्तित्व खतरे में पड़ गया। व्यापारी अपना मनोबल व्यवसाय की वृद्धि में लगाता है। औद्योगिक विकास के साथ शोषण के तरीके भी सोचता है, राजनीतिज्ञ एक ओर प्रजापालन की बात सोचता है, दूसरी ओर शत्रु के नाश की। इस प्रकार मनोबल का उपयोग दोनों दिशाओं में होता आया है। भारतीय ऋषि-मुनियों ने कल्याणकारी बनाने के लिए उसका संबंध अध्यात्म के साथ जोड़ दिया।

प्रात: जागने से लेकर रात्रि में नींद आने तक हमारे मस्तिष्क को अनेक प्रकार के विचार घेरे रहते हैं। नींद के बाद भी सपनों में उनका तांता चलता रहता है। बहुत से विचार स्वास्थ्यप्रद और जीवन के लिए उपयोगी होते हैं। वे जब आते हैं तो मन में सुख तथा शक्ति की अनुभूति होती है, किन्तु अधिकांश विचार निरर्थक और मन की निर्बल बनाने वाले होते हैं. कभी दस वर्ष पहले की घटना याद आती है कि अमुक व्यक्ति ने हमारे साथ दुर्व्यवहार किया था। उसके विरुद्ध द्वेष सुलगने लगता है और मन उत्तेजित हो जाता है। कभी निराशा घेर लेती है और कभी अप्रत्याशित भय। कभी बैठे-बैठे मन में आने लगता है कि अमुक व्यक्ति मुझसे मिलेगा यदि उसने अच्छा व्यवहार नहीं किया तो मैं इस प्रकार डाटुंगा, इस पर वह उत्तीजत हा र हाथापाई की नौबत आ सकती है। कभी अप्रत्याशित वस्तु को कामना। है और कभी प्राप्त वस्तु के नाश का भय होने लगता है। योगदर्शन में इन सब या की क्लेश कहा गया है। यदि मन उनसे बचा रहे तो शक्ति का अपव्यय रुक और संचित शक्ति का उपयोग अभीष्ट लक्ष्य को प्राप्ति में किया जा सकता है।

Additional information

Weight 360 g
Dimensions 14 × 21.5 × 1.5 cm

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