Sufi Kavi Bulley Shah (HB)

250

ISBN: 978-81-7309-7
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Description

भारतीय साहित्य में सूफ़ी कवियों ने प्रेमतत्त्व का वर्णन करते हुए प्रेम-पंथ का प्रवर्जन किया। सूफ़ियों का विश्वास एकेश्वरवाद में है। यहाँ अस्तित्व केवल परमात्मा है। वह प्रत्येक वस्तु में व्याप्त है। सूफ़ी साधक का मुख्य कर्तव्य ध्यान और समाधि है, प्रार्थना और नामस्मरण है, फकीरी के फक्कड़पन में है। सभी तरह की धार्मिकता और नैतिकता का आधार प्रेम है। प्रेम के बिना धर्म और नीति निर्जीव हो जाते हैं। साधक यहाँ ईश्वर की कल्पना परमसुंदरी नारी के रूप में करता है। इस तरह सूफ़ीमत में ईश्वर साकार सौंदर्य है और साधक साकार प्रेम । विशेष बात यह है कि सूफ़ी संप्रदाय में राबिया जैसी साधिकाएँ भी हुई हैं जो ईश्वर को पति मानती हैं। इस तरह सूफ़ी-प्रेमपंथ में विचारों की स्वाधीनता है। सौंदर्य से प्रेम और प्रेम से मुक्ति, यह सूफ़ीमत के सिद्धांतों का सार सर्वस्व है। इसी प्रेम की प्राप्ति के लिए सूफ़ियों ने इश्क मजाजी (लौकिक प्रेम) तथा इश्क हकीकी (अलौकिक प्रेम) का दर्शन प्रस्तुत किया। ‘बका’ से ‘फ़ना’ हो जाना ही ‘मोक्ष’ है। | सूफ़ीमत के उद्गम चाहे अन्य देशों में रहे हों किंतु संप्रदाय के रूप में उसका संगठन इस्लामी देशों में हुआ। अरब के नगरों में यहूदी, ईसाईयत, हिंदुत्व, बौद्धमत और इस्लाम इन सभी धर्मों का मिलन हुआ था। इस्लाम का संपर्क ईरान में जरथुस्त्रवाद से भी हुआ। सूफ़ीमत इनका योग तो नहीं है, किंतु उस पर इन सभी का प्रभाव है।

Additional information

Weight 335 g
Dimensions 14.3 × 22 × 1.10 cm

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