Mahatma Ki Chhaya Me/महात्मा की छाया में-इला रमेश भट्ट 100/-
RS:
₹100
98 in stock
ISBN: 978-81-7309-682-2
Pages: 120
Language: Hindi
Year: 2019
Binding: Paper Cover
Fully
Insured
Ships
Nationwide
Over 4 Million
Customers
100%
Indian Made
Century in
Business
Book Description
महात्मा की छाया में
भारतीय स्वाधीनता-आंदोलन की लय ने पूरे भारतीय मानस को नई प्रेरणादायी गांधी-चिंतन ज्योति से भर दिया था। भारतीय चिंतन परंपराओं में जो भी मूल्यवान था—गांधीजी उसी की सर्वोत्कृष्ट अभिव्यक्ति थे। देश के मानस ने पहली बार इतने बड़े संत-योद्धा का साक्षात्कार किया था। प्रेरणानायक गांधीजी ने सोए भारतीय जनमानस को नवजागरण का मंत्र देकर जागृत किया। देश का जन-जन ब्रिटिश साम्राज्यवाद के शोषण तंत्र से मुक्त होने के लिए संघर्ष कर उठा। गांधी विचार प्रवाह में आकर डॉ. श्री मणिधर प्रसाद जैसे देशभक्त देश के मुक्ति-संग्राम में कूद पड़े। उनका समूचा जीवन महात्मा गांधी के आदर्शों की छाया में ही खिला और फला-फूला था। गांधी जी ने जिन-जिन नए मूल्यों, प्रतिमानों को जनता के समक्ष रखा था उन्हें आत्मसात करने के सफल प्रयत्नों की यह अमिश्रित कथा है। एक खास अर्थ में यह गांधी के सत्यनिष्ठ-सेवक की तप-कथा है।
दरअसल, डॉ. मणिधर ने अपने जीवन में घटनेवाली महत्त्वपूर्ण घटनाओं की एक डायरी लिखी थी। उस डायरी ने इला रमेश भट्ट को इतना प्रभावित किया कि डॉ. मणिधर की महानता की ओर तो उनका ध्यान गया ही, उनके मानस में यह बीज-भाव का संकल्प भी जन्मा कि इस डायरी को नए युवकों, प्रबुद्ध पाठक समाज के लिए उपलब्ध कराया जाए ताकि यह नई पीढ़ी उस समय के इतिहास, समाजशास्त्र, अर्थशास्त्र तथा राजनीति से साक्षात्कार कर सके। आज हम भारतीय स्वाधीनता-आंदोलन और गांधी जी के जीवन-तप-त्याग को भूल गए हैं और उत्तर आधुनिकतावाद की झोंक में पड़कर देशभक्ति का पद गाली बन गया है।

Reviews
Clear filtersThere are no reviews yet.