Hiranand Shastri Smarak Vyakhayan Mala (Part-I)

275500

ISBN: 978-81-7309-4
Pages: 543
Edition: First
Language: Hindi
Year: 2011
Binding: Paper Back

SKU: N/A Category:
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Description

प्रस्तत पुस्तक में ‘हीरानंद शास्त्री स्मारक व्याख्यान माला’ के महत्त्वपूर्ण व्याख्यान संकलित हैं। उल्लेखनीय है कि इस व्याख्यानमाला का आरंभ अज्ञेय जी ने किया था जो श्रेष्ठ कवि, कथाकार और उपन्यासकार ही नहीं, श्रेष्ठ आलोचक और चिंतक भी थे। इस दृष्टि से पुस्तक की महत्ता और भी अधिक बढ़ गई है।

अज्ञेय का लेखन और चिंतन अत्यंत वैविध्यपूर्ण रहा है। स्वाभाविक है कि कवि की रुचि और दृष्टि की छाप पुस्तक में संकलित व्याख्यानों पर भी हो। यह पुस्तक ज्ञान की एक संपूर्ण पोथी की तरह है जिसमें इतिहास, पुरातत्त्व, दर्शन, अध्यात्म, संस्कृति, साहित्य, काव्यशास्त्र और आलोचना पर विशेषज्ञ विद्वानों के गंभीर और चिंतनपरक व्याख्यान संकलित किए गए हैं। आमतौर पर हिंदी में ऐसे गंभीर विषयों पर चिंतन नहीं किया जाता है किंतु यह पुस्तक इस कमी को बहुत हद तक पूरा करती है। दूसरे, हिंदी के लेखकों पर भी यह आरोप लगता रहा है कि वे हिंदी के अलावा किसी अन्य विषय की ओर रुख नहीं करते, इसीलिए हिंदी का साहित्य वैचारिक स्तर पर विपन्न होता है। यह पुस्तक इस आरोप का भी उत्तर प्रस्तुत करता है।

प्रस्तुत पुस्तक में पाँच विद्वानों के पाँच विषयों पर केंद्रित कुल बीस व्याख्यान सम्मिलित किए गए हैं। प्रथम व्याख्यान प्राचीन साहित्य, कला, दर्शन और इतिहास के विद्वान गोविंद चंद्र पांडे का है जिसका विषय है-‘ भारतीय परंपरा के मूल स्वर’। दूसरा व्याख्यान भारतीय पुरातत्त्व के प्रख्यात विद्वान गोवर्धन राय शर्मा का है। और उसका विषय है-‘ भारतीय संस्कृति : पुरातात्त्विक आधार’।

Additional information

Weight 760 g
Dimensions 16.1 × 23.9 × 2.9 cm
Book Binding

Hard Cover, Paper Back

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